गुरुकुल कांगड़ीः हर्षोल्लास से मनाया गया ऋषि बोधोत्सव पर्व


डा0 संदीप भारद्वाज,हरिद्वारः  गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय विभाग के मुख्याधिष्ठाता डा0 दीनानाथ शर्मा ने छात्रों और अध्यापकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि गुरुकुल की परम्परा को संजीवनी देने का काम ऋषि दयानन्द सरस्वती ने किया था। आज 102 साल से गुरुकुल पद्धति को सकारात्मक रूप में चलाने का काम गुरुकुल विद्यालय कर रहा है। यहाँ के ब्रह्मचारियों को आर्य समाज की कसोटी पर कसा जाता है, जिससे उनके अन्दर यज्ञ करने की परम्परा पल्लवित हो रही है। इस परम्परा को बनाए रखने के लिए यहां के अध्यापक और अधिष्ठाता पूर्ण निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं।


गुरुकुल एक ऐसी संस्था है जहां स्वामी श्रद्धानन्द जी की तपस्थली से सबको ऊर्जा मिलती है। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती को समझना है तो वेदों का अध्ययन करना अत्यन्त आवश्यक है। वर्तमान के युग में वेद हमारे विज्ञान है, जिसको वैज्ञानिकों ने अपने आविष्कार का विशेष हिस्सा बनाया है।


गुरुकुल कांगड़ी विद्यालय हरिद्वार में प्रातः 10.00 बजे यज्ञ के साथ ऋषि बोधोत्सव पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुकुल के ब्रह्मचारी हार्दिक कक्षा 12 एवं ब्रह्मचारी अविरल वर्मा कक्षा 9 ‘अ’ ने ऋषि दयानन्द के व्यक्तित्व एवं दार्शनिक पक्ष को वैदिकता की कसौटी पर उत्तोलित कर रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।


 मुख्याध्यापक डा॰ विजेन्द्र शास्त्री ने ब्रह्मचारियों को अवगत कराया कि महर्षि दयानन्द ईश्वर भक्ति के साथ-साथ समाज सुधर के कार्यों को भी महत्ता देते थे।

डा0 योगेश शास्त्री ने कहा कि ऋषि दयानन्द ने अपने बाल्यकाल के नाम मूलशंकर को ही अपना मूल मानकर शंकर के मूल को जानकर तथा सत्यार्थ प्रकाश जैसा अमर ग्रंथ लिख कर साकार किया।

इस अवसर पर जितेन्द्र कुमार वर्मा, अशोक कुमार आर्य, डा॰ योगेश शास्त्री, डा॰ हुकमचन्द, अश्विनी कुमार, अमर सिंह, ब्रजेश कुमार, वेदपाल सिंह, लोकेश शास्त्री, अशोक कुमार, अमित कुमार, राजकमल, दीपकमल, विजय कुमार, धर्म  सिंह, गौरव कुमार, सज्जन सिंह, धीरज दत्त कौशिक, योगेश चैधरी एवं समस्त अधिष्ठातागण तथा समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डा योगेश शास्त्री ने किया।