मानवभारती स्कूल में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम
देहरादूनः समय रहते सजग नहीं हुए तो 2050 तक यह स्थिति आ जाएगी कि पानी को गहनों की तरह अलमारी में बंद रखना पड़ेगा। मानव भारती स्कूल में आयोजित वसंतोत्सव के दौरान नाट्य मंचन के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया। बच्चों ने चल संपत्ति से ज्यादा जल संपत्ति पर ध्यान देने को कहा।

मानवभारती स्कूल परिसर में दो दिवसीय वसंतोत्सव के पहले दिन जल बचाओ  नाटक का मंचन किया गया। बच्चों ने बताया कि नदियां जल का स्वरूप हैं और नदियों ने मानव ही नहीं बल्कि सभी प्राणियों को जीना सिखाया है। वो सभी के जीवन का आधार हैं, लेकिन मनुष्य नदियों को प्रदूषित कर रहा है।

पानी को व्यर्थ ही बहाया जा रहा है। जल अमूल्य है, इस बात को नहीं समझा जा रहा है। अगर, ऐसा ही होता रहा तो 2050 तक पानी को ताले में बंद रखना पड़ेगा और बहुत जरूरत होने पर ही पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। वसंतोत्सव में प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने, नदियों में कूड़ा नहीं फेंकने, बारिश का पानी बचाने की अपील की गई। 

इस दौरान बच्चों ने एनीमल्स मार्चपास्ट के जरिये जीवों के प्रति संवेदनशील होने तथा जैवविविधता का स्वागत करने का संदेश दिया। क्लास नर्सरी, केजी के बच्चे ग्रुप में टेडीबियर व पांडा बनकर मंच पर पहुंचे तो अभिभावकों ने तालियों से उनका स्वागत किया। बच्चों ने श्रीगणेश वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत किए।

मुख्य अतिथि शिक्षाविद्  डॉ. सुशील कुमार सिंह, मानव भारती के निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर, प्रिंसिपल राजीव सिंघल, शिक्षक डॉ. अनंतमणि त्रिवेदी ने दीप प्रज्ज्वलित करके वसंतोत्सव का शुभारंभ किया। बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा में गढ़वाली गीत भलू लगदू मेरू मुलुक...श् तथा धरा हमरा गढ़वाल की...श् प्रस्तुत किया। बच्चों ने अंग्रेजी नाटक द पाइड पाइपर ऑफ हैमेलिन का मंचन किया।

मुख्य अतिथि डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि शिक्षा विश्लेषण की शक्ति है। शिक्षा मूल्यों व संस्कृति का रोपण है। हमारे बच्चों के लिए क्या बेहतर है, यह हमारी जिम्मेदारी है।

उन्होंने बच्चों को मूल्यों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा किसी भी स्कूल के बड़े भवन से तय नहीं होती, बल्कि इसका आकलन इस बात से किया जाता है कि बच्चों में क्या रोपा जा रहा है, उनको क्या सिखाया जा रहा है। समारोह के अंत में निदेशक डॉ. हिमांशु शेखर ने उपस्थित अतिथियों, अभिभावकों, शिक्षक- शिक्षिकाओं का आभार व्यक्त किया।