नेपाल के पूर्व राजदूत निरंजन मान सिंह ने की स्वामी चिदानन्द से भेंट


डा0 संदीप भारद्वाज ,ऋषिकेशः परमार्थ निकेतन में नेपाल के भूतपूर्व राजदूत और लुम्बिनी रिसर्च सेंटर फाॅर अंडरस्टैंडिंग एडं पीस के अध्यक्ष निरंजन मान सिंह बासनीत पधारे, उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंटवार्ता की। लुम्बिनी रिसर्च सेंटर, प्रमुख रूप से पूरी दुनिया में कार्यरत शान्ति प्रक्रियाओं का समर्थन करता है, भगवान बुद्ध के शान्ति संदेशों को पूर्ण करने हेतु हर सम्भव प्रयत्यशील है, आंतरिक और बाहरी शान्ति अवधारणाओं के लिये कार्य कर रहा है, साथ ही वहां शान्ति संदेशों पर गहन शोध भी जारी है। यह संगठन शान्तिपूर्ण जीवन जीने हेतु प्रेरित करने वाले सभी संगठनों को एक साथ लाने के लिये प्रयासरत है चाहे वे किसी भी धर्म को मानने वाले हो।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने नेपाल के भूतपूर्व राजदूत श्री निरंजन मान सिंह जी बासनीत से कहा कि पूरा विश्व स्थायी शान्ति की तलाश में है, सभी शान्ति चाहते है परन्तु शान्ति की स्थापना तभी हो सकती है जब कि हम हमारे पास जितने प्राकृतिक साधन बचे हुये है उसमें जीवन यापन करना शुरू करें। प्राकृतिक साधनों का उचित उपयोग ही स्थायी शान्ति का स्रोत है। उन्होने कहा कि शान्ति संदेशों को प्रचारित करके हम दुनिया के एक वर्ग तक तो शान्ति पहुंचा सकते हैं परन्तु जो दूसरा वर्ग है वह मौलिक जरूरतों के अभाव में जीवन यापन कर रहा है उसकी जब तक मौलिक सुविधायें यथा स्वच्छ जल, शुद्ध वायु, पर्याप्त भोजन, शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सेवायें जैसी जरूरतें पूरी नहीं हो जाती तब तक शान्ति की कल्पना नहीं की जा सकती। स्वामी जी ने कहा कि वास्तव में शान्ति मनुष्य के भीतर ही विद्यमान है, ध्यान के माध्यम से उसे प्राप्त किया जा सकता है।
 स्वामी जी ने कहा कि वर्तमान समय में लोक कल्याण के लिये समर्पित, ’’इद्म राष्ट्राय स्वाहः इद्म नमम्’’ ’’योगः कर्मसु कौशलं’’ के संस्कारों से युक्त युवा पीढ़ी तैयार करनी होगी तथी हम पीड़ित मानवता की सेवा और अभावग्रस्त लोग का कल्याण कर सकते हैं। ऐसे युवा तैयार करना होगा जिनका जीवन ही मानव और प्रकृति की सेवा के लिये समर्पित हो, उनका जीवन यज्ञ के समान हो जो दूसरों के दर्द को समझ सकें तभी एक वैश्विक परिवार की स्थापना हो सकती है। ।