डॉली डबराल की कथा कृति चूरमा का हुआ लोकार्पण
देहरादून: डॉली डबराल की संस्मरणात्मक कथा कृति चूरमा का लोकार्पण मेयर सुनील उनियाल गामा, साहित्यकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने किया। नगर निगम में आयोजित लोकार्पण समारोह में मेयर ने कहा कि, पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए जिस पुस्तक के लोकार्पण समारोह का निमंत्रण कागज के अनावश्यक प्रयोग के बजाय हस्तलिखित आम पत्र पर दिया गया हो, वह लेखिका का पर्यावरण के प्रति प्रेम दिखाता है। 

उन्होंने सभी को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया है। समारोह की अध्यक्षता कर रही संस्कृत विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ सुधारानी पांडेय ने कहा कि, चूरमा में भले ही संग्रहित संस्मरण हो, पर पढ़ने पर यह सभी को अपने जीवन की कहानियां प्रतीत होंगी।

डॉ वीके जोशी ने कहा कि, कविता के साथ कहानी विधा से डॉली ने अपनी लेखनी से समृद्ध किया है। डॉ एस फारुख ने शेरों के माध्यम से डॉली डबराल की लेखन क्षमता की प्रशंसा की। सीमा शफक ने संकलन में शामिल बेबे कहानी का जिक्र करते हुए दादी पोती के अनूठे रिश्ते को बयां किया।

डॉ सविता मोहन ने सभी कहानियां उत्सुकता दिखाती हैं। जो संस्मरण को जीवंतता प्रदान करती है। लखनऊ से आई कवियत्री डॉ संध्या सिंह ने कहा कि, सामाजिक विसंगतियों को सरल लहजे में कहना डॉली की विशेषता है। डॉ जयवंती डिमरी ने कहा कि, उनकी पूर्व प्रकाशित अफ्रीका हाउस कृति की तरह ही, इस संग्रह में भी ताजगी दिखाई देती है।

डॉली की ये पांचवी कृति है। इससे पहले मंचासीन अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इंगिता पुजारी, पूनम नैथानी ने वंदना, स्वागत गीत प्रस्तुत किया।

मौके पर डॉ शेरजंग गर्ग स्मृति सम्मान कथाकार सुभाष पंत, गुरुदीप खुराना, मदन शर्मा व सुशील डोभाल को दिया गया। समारोह में डॉ रामविनय सिंह, अम्बर खरबंदा, असीम शुक्ल, राजीव बेरी, मीनाक्षी गंडोत्रा, कंचन सेठ, हेमलता बहन, कमला पंत, डॉ अतुल शर्मा, रंजना शर्मा, रेखा शर्मा, नंदनी शर्मा, मुनिराम सकलानी, इकबाल आजर, उमा भट्ट, सुष्मिता सेन गुप्ता, नीमा बहुगुणा, गिरीश बहुगुणा, रमा गोयल, अरुण कुमार गुरंग, मुकेश नॉटियाल, संजय कोठियाल मौजूद थे।