जान जोखिम में डालकर कर्मचारी कर रहे हैं विभाग के लिए राजस्व वसूली 

हरिद्वार, नवल टाइम्स: जहां सब  अपने अपने स्तर से लोगों को कम से कम संपर्क में आने के लिए अपील कर रहे हैं  वही कुछ विभाग अपने राजस्व वसूली के लिए कर्मचारियों की जान को  जोखिम में डालकर  राजस्व वसूली का कार्य ले रहे हैं इससे न केवल कर्मचारियों में बल्कि सामाजिक स्तर पर भी  वायरस के फैलने का खतरा बढ़ सकता है विभागों के अधिकारी अपना बचाव तो कर रहे हैं लेकिन अपने कर्मचारियों को फील्ड में भेज कर दो डोर वसूली के लिए दवाब बना रहे हैं जबकि आजकल कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए सरकार तक ने एडवाइजरी जारी की है जिसमें कम से कम लोगों के आपस में संपर्क में आने के लिए कहा गया है इससे सभी विभागों ने अपने-अपने कार्यालयों को बंद कर दिया गया है या अपने कर्मचारियों की संख्या को कम कर दिया है और घर बैठे काम करने के लिए कहा गया है लेकिन जल संस्थान के अधिकारीयों को शायद राजस्व वसूली ज्यादा आवश्यक लग रही है और उन्हें संक्रामक बीमारी को पहले से रोकने में कोई दिलचस्पी नहीं है. अधिकारियों ने तो अपने बचाव को देखते हुए बायोमेट्रिक उपस्थिति पर तो रोक लगा दी है लेकिन लेकिन राजस्व वसूली के लिए कर्मचारियों को फील्ड में डोर टू डोर  भेजने से कोई गुरेज नहीं है या अधिकारियों को अपनी राजस्व वसूली ज्यादा प्यारी लग रही है कि जो उन्होंने अपने कर्मचारियों समाज को, देश को दांव पर लगा दिया है या फिर इस कोरोना वायरस के खतरे को समझना ही नहीं चाहते हैं या अभी शायद यह अंदेशा ही नहीं लगा रहे हैं कि यह कितना भयानक रूप हो सकता है.तो क्या राज्य के लिए राजस्व वसूली ज्यादा जरूरी है या राज्य के लोगों में महामारी को बढ़ने से रोकना ज्यादा जरूरी है
 क्या किसी अनहोनी की दशा में विभाग उसकी जिम्मेदारी लेंगे और अगर जिम्मेदारी ले भी ली तो उस स्थिति में इस जिम्मेदारी को लेने का फायदा ही क्या होगा.