किशोरी की मौत: स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही तथा असंवेदनशीलता


हरिद्वार,नवल टाइम्स: कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए भारत सरकार द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं और देश के लिए समर्पित डॉक्टर अपनी जान की बाजी लगाकर कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज कर रहे हैं मगर इससे विपरीत हरिद्वार में एक किशोरी की मौत का मामला सामने आया है जिसमें डॉक्टर की लापरवाही साफ सामने आ रही है।


किशोरी की मौत के बाद अब जिला प्रशासन इस मामले में जांच कर कार्रवाई की बात कर रहा है मगर जिला प्रशासन की भी इसमें लापरवाही सामने नजर आई 24 घंटे बीतने के बाद भी किशोरी के परिजनों का सैंपल स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं लिया गया केवल घरों में परिजनों को क्वारंटीन कर अपनी खानापूर्ति की। बात के ज्यादा बढने के बाद में स्वास्थ्य विभाग द्वारा किशोरी के परिजनों के ब्लड के सैंपल आाज दोपहर बाद लिये गये।


जानकारी के अनुसार शंकर आश्रम के पास एक कालोनी में एक किशोरी पिछले कई दिनों से बीमार चल रही थी उसे बुखार के साथ ही गले में भी कुछ समस्या बताई गई थी रविवार शाम को तबीयत बिगड़ने पर पहले किशोरी को एक निजी अस्पताल में ले जाया गया जहां से उसे जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया वहीं इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई सोमवार की दोपहर बाद किशोरी का अंतिम संस्कार किया गया किशोरी के परिजन के अनुसार किशोरी की कुछ दिनों से तबियत खराब थी उनके द्वारा प्राइवेट हॉस्पिटल में किशोरी का इलाज कराया जा रहा था किशोरी की तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद उसे प्राइवेट हॉस्पिटल लेजाया गया मगर वहां किशोरी को देखने से मना कर दिया ।वहां से किशोरी को जिला हॉस्पिटल लेकर गए मगर वहां पर भी डॉक्टरों ने उसे नहीं देखा और उन्हे मेला अस्पताल भेज दिया वहां पर महिला डॉक्टर द्वारा किशोरी को देखा गया और बोला कि किशोरी बिल्कुल ठीक है और कोरोना के कोई लक्षण नहीं है इसे भर्ती नही कर सकते । मगर किशोरी की हालत काफी खराब थी । उन्होने कहा कि आप लिखित में शिकायत करें तब कार्रवाई की जाएगी । हमारे यहां के कुछ घरों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्वारंटीन किया गया है।


यहां हॉस्पिटल द्वारा किया गया गैर-जिम्मेदाराना रवैया असंवेदनशीलता को तथा ब्लड के सैंपल लेने में इतनी देरी स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को दर्शाता है।


प्राइवेट हॉस्पिटल,जिस में किशोरी का इलाज कराया जा रहा था, उस हॉस्पिटल के द्वारा भी ऐसा गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार डाक्टरों  की असंवेदनशीलता तथा लापरवाही को दर्शाता है।