क्या गरीब प्रदेश दो-दो अस्थायी राजधानियों का बोझ झेल पायेगाः मोर्चा
विकासनगरः जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि अभी हाल ही में त्रिवेन्द्र सरकार ने गैरसैंण को अस्थायी राजधानी बनाने की घोषणा की, जोकि जनभावना के आयने में ठीक हो सकती है, लेकिन अगर राज्य की आर्थिकी, जनसरोकार व सुलभ न्याय पाने की दृष्टि से सोचें तो एक गरीब प्रदेश के लिए इससे कष्टकारी कार्य कोई हो नहीं सकता।

मोर्चा कार्यालय में पत्रकारों से वार्ता करते हुए नेगी ने कहा कि एक गरीब प्रदेश में दो-दो अस्थायी राजधानियों का बोझ प्रदेश उठाने की स्थिति में नहीं है। आलम यह है कि प्रदेश को 33701 करोड़ रूपया बाजारू कर्ज चुकाना है तथा 47,580 करोड़ (31.03.2019 तक) का अन्य कर्ज चुकाना है, जोकि अब तक लगभग 50000 करोड़ हो चुका है। वर्तमान में प्रदेश सरकार लगभग 3000 करोड़ प्रतिवर्ष बाजारू कर्ज का ब्याज चुकाने में खर्च कर रही है।