पंकज खन्ना हत्याकांड: 24 साल बाद हुआ न्याय

संजीव शर्मा, हरिद्वारः  कनखल के चिकित्सक डॉ. कैलाश खन्ना के बेटे मेडिकल स्टोर संचालक पंकज खन्ना की हत्या में चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश रीना नेगी ने तीन पुलिसकर्मियों समेत छह लोगों को सश्रम आजीवन कारावास और दस-दस हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। फैसला सुनाते ही सेवानिवृत्त सीओ समेत सभी छह आरोपियों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। 


 शासकीय अधिवक्ता नीरज गुप्ता ने बताया कि वादी विवेक खन्ना ने कनखल थाने पर एक जून 1996 को अपने भाई पंकज खन्ना की हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसका कहना था कि वह और उसका बड़ा भाई पंकज खन्ना बंगाली हॉस्पिटल रोड स्थित अपने खन्ना मेडिकल हॉल पर बैठे थे। रात को करीब पौने नौ बजे वहां पांच व्यक्ति तमंचा व खुखरी लेकर आए।
उन्होंने पंकज खन्ना को दुकान से बाहर खींच लिया और गोली मारकर भाग गए। उसे बंगाली अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने पंकज को मृत घोषित कर दिया था। विवेक खन्ना ने आरोप लगाया था कि उनके पिता डॉ. कैलाश खन्ना कृष्णा मेडिकल हॉल के स्वामी राजेश भारद्वाज के खिलाफ मुकदमे में पैरवी करते थे। इसलिए राजेश भारद्वाज उनके परिवार से रंजिश रखते थे।