तवांग अरूणाचल के बौद्ध बच्चों का दल पहुंचा परमार्थ निकेतन 

डा0 संदीप भारद्वाज,ऋषिकेशः परमार्थ निकेतन में तवांग, अरूणाचल प्रदेश से बौद्ध सम्प्रदाय के 40 बच्चों ने दो सप्ताह तक रहकर यहां की विभिन्न गतिविधियों में सहभाग किया। परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती के सान्निध्य में विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया। परमार्थ निकेतन में दो सप्ताह तक रहकर 40 बौद्ध बच्चों के इस दल ने ध्यान, योग, सत्संग, प्रार्थना, भजन, गंगा आरती में सहभाग कर उत्तराखण्ड की संस्कृति को आत्मसात किया। इन बच्चों ने परमार्थ निकेतन में होने वाले अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग किया और पूरे महोत्सव का आनन्द लिया। उसके पश्चात उत्तराखंड की संस्कृति को निहारने, जानने और समझने का भी प्रयास किया।



लामा जी ने कहा कि भारत और चीन की सीमा में तवांग हिमालय की तरह अडिग प्रहरी के रूप में खड़ा है जो कि भारतीय संस्कृति का परचम लहरा रहा है तथा भारत की एकता और अखंडता के गीत गा रहा है।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि परमार्थ गुरूकुल के बच्चे और तवांग से आये बौद्ध सम्प्रदाय के बच्चों ने दो सप्ताह तक साथ-साथ रहकर भाईचारे और एकता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया, देश को इस समय जो असल जरूरत है वह है भाईचारे की, सद्भाव की और एकत्व की। यह केवल दो संस्कृतियों के मिलन नहीं है बल्कि नई पीढ़ी के छोटे-छोटे बच्चों के विचारों का मिलन है जो आगे एक नयी संस्कृति को जन्म देगा।

गुरूकुल और बौद्ध मठ के बच्चों ने एक साथ रहकर प्रेम, मोहब्बत और एकता का संदेश दिया है इस तरह की संस्कृतियों के मिलन से निश्चित रूप से एक मजबूत भारत का निर्माण होगा। स्वामी जी ने कहा कि बेशक हमारे धर्म अलग हो सकते हैय प्रार्थना करने के तरीके अलग हो सकते हैं लेकिन हम सब एक हैं, एक परिवार हैं, हम सभी भारतीय हैं। साध्वी भगवती सरस्वती जी ने बच्चों को पर्यावरण और जल संरक्षण के बारे में जागरूक करते हुये कहा कि चाहे हम किसी भी धर्म, सम्प्रदाय या मजहब को मानने वाले हाें परन्तु हम सभी की पहली जरूरत है शुद्ध वायु, स्वच्छ जल और स्वच्छ सुन्दर परिवेश।