बड़े मीडिया संस्थानों के रवैये पर राष्ट्रीय पत्रकार संघों ने जताई नाराजगी
संजीव शर्मा, हरिद्वारः विभिन्न राष्ट्रीय पत्रकार यूनियन्स ने महामारी कोविड़ 19 के चलते हुए लॉकडाउन में देश के नामी-गिरामी मीडिया संस्थानों द्वारा उनके यहां काम करे पत्रकारों के वेतन कटौती, यकायक नौकरी से हटाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इस पर गहरा असन्तोष व नाराजगी जताई है।

एक व्यक्तव्य में प्रेस एसोसिएशन, इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट आई, वर्किंग न्यूज कैमरामैन एसोसिएशन ने देश भर में चल रहे लॉक डाउन के बीच मीडिया संस्थानों के इस व्यवहार को गैर जिम्मेदाराना और जल्दबाजी में किया गया फैसला बताया है।

बताते चले कि लॉक डाउन के तीसरे सप्ताह के बीच इंडियन एक्सप्रेस और बिजनेस स्टैण्डर्ड जैसे बड़े संस्थानों ने अपने कर्मचारियों को सेलरी कट का फरमान सुनाया है। यही नहीं टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे संस्थान ने अपनी संडे मैगजीन टीम के पूरे स्टाफ को निकाल बाहर किया है। 

जहां न्यूज नेशन ने अपने इंग्लिश डिजिटल के 16 कर्मचारियों को हटा दिया, वहीं क्विंट ने अपनी आधी टीम को बिना पैसे वाली छुट्टी पर भेज दिया है। इंडिया टुडे ने भी 46 रिपोर्टर्स, 6 कैमरामैन और 17 प्रोडूसर्स की एक ऐसी लिस्ट तैयार की है जिन्हें मौजूदा परिस्थितियों में हुई आर्थिक हानि की आड़ में तत्काल बाहर करने की बात कही जा रही है।

एक राष्ट्रीय स्तर की न्यूज एजेंसी ने अपने कर्मचारियों को मात्र साठ फीसदी भुगतान ही किया है। ऐसी भी खबर है कि हिंदुस्तान टाइम्स अपना मराठी संस्करण आगामी 30 अप्रैल से बंद करने जा रहा है और इसके चलते उन्होंने अपने संपादक समेत पूरी टीम को घर भेजने की तैयारी कर ली है।

यही नहीं उर्दू पेपर नई दुनिया और मैसूर के इवनिंग स्टार ने अपने भी अपने संकरण का पब्लिकेशन टाल दिया है वहीं आउटलुक जैसी मैगजीन ने अपना प्रिंट संस्करण रोक दिया है। जब पूरे औद्योगिक संस्थानों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाकर अपने कर्मचारियों को पूरा भुगतान देने को कहा गया है ऐसे में यह कटनी-छंटनी और भुगतानों को रोकने इत्यादि की सभी यूनियन्स कड़ी निंदा करती हैं।

यूनियन्स का कहना है कि गत समय में मीडिया इन्डस्ट्री ने बहुत तरक्की की है और आर्थिक रूप से भी काफी विकास किया है। ऐसे में दसियों सालों से हुए संस्थागत व आर्थिक विकास को एक झटके में दरकिनार करते हुए इन बड़े मीडिया घरानों की ऐसी छोटी सोच व एप्रोच निन्दनीय है जिसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता।

यूनियन्स का कहना है कि कोविड़ 18 जैसी महामारी के कठिन दौर में चल रहे लॉक डाउन जैसे समय में बड़े मीडिया घराने अपने कर्मचारियों के प्रति जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते। यूनियन्स का कहना है कि वह भी मानते हैं कि समय मुश्किल है लेकिन यदि इतने बड़े मीडिया घराने इस तरह का रवैया अपनाएंगे तो मध्यम और छोटे अखबारों की मुश्किलों का अंदाजा लगाया जा सकता है।

राष्ट्रीय यूनियन्स ने इन मीडिया घरानों से गुजारिश की है कि वह एक वृहद दृष्टिकोण अपनाते हुए इस कठिन वर्तमान दौर में अपने कर्मचारियों के प्रति मानवीय रवैया अपनाते हुए उनका ध्यान रखेंगे। जिससे कि उनके कर्मचारियों को कम से कम मुश्किलों का सामना करना पड़े। यूनियन्स का सुझाव है कि इस कठिन दौर में मीडिया संस्थान सरकारों तक अपनी बात पहुंचा उन्हें इस मुश्किल समय से निकालने का सुझाव मांग सकते हैं। लेकिन इस अत्यंत महत्वपूर्ण समय में मीडिया संस्थान सही सूचनाएं समाज तक पहुंचाने की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते।

राष्ट्रीय यूनियन्स की तरफ से जारी व्यक्तव्य इंडियन जर्नलिस्ट यूनियन के अध्यक्ष व महासचिव के श्रीनिवास रेड्डी व बलविंदर सिंह जम्मू, डब्लूएनसीए के अध्यक्ष व महासचिव एसएन सिन्हा व सोनदीप शंकर, प्रेस एसोसिएशन के जयशंकर गुप्ता व सीके नायक, एनयूजे आई के रासबिहारी व प्रसन्ना मोहंती द्वारा जारी किया गया।