भक्ति और शक्ति का दिव्य संगम हैं हनुमान जीः स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश, नवल टाइम्सः  परमार्थ निकेतन में सोशल डिसटेंसिग का कड़ाई से पालन करते हुये हनुमान जयंती मनायी गयी। प्रातःकाल से ही आश्रम में अनेक आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया गया यथा श्री हनुमान चालीसा, सुन्दर काण्ड का पाठ, ध्यान और कोरोना मुक्त विश्व हेतु विशेष जप किया गया।


परमार्थ परिवार के सदस्यों ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के मार्गदर्शन में आयोजित हनुमत यज्ञ में ऊँ हम हनुमते नमः स्वाहा और ’हरि ओम शांत कोरोना शांत स्वाहा’ मंत्र से विशेष आहुतियाँ प्रदान की गयी। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि श्री हनुमान जी अद्भुत आत्मबल, आत्मसंयम, शौर्य, गंभीरता, संयम और समझदारी जैसे अद्भुत गुणों के युक्त थे जिनके परामर्श को सकल गुण करूणानिधान भगवान श्री राम भी सबसे अधिक प्रमुखता देते थे। हनुमान जी ने जीवन पर्यन्त सेवा कार्यो को किया फिर भी उनमें कोई अकड़ नहीं थी परन्तु पकड़ बहुत मजबूत थी इसलिये तो आज भारत वर्ष में सबसे अधिक मन्दिर श्री हनुमान जी के ही हैं।
 स्वामी जी ने कहा कि जैसे हनुमान जी ने अपनी संकल्प शक्ति से लंका के युद्ध में विजय प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी वैसे ही हमें इस कोरोना वायरस पर विजय प्राप्त करने हेतु श्री हनुमान जी का स्मरण करें, हनुमान चालीसा का पाठ, घर में ही रहें, लाॅकडाउन का पालन करें और अपने परिवार के साथ सत्संग करे।


स्वास्थ्य कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने जो भी नियम और निर्देश जारी किये हैं उनका पूरा-पूरा पालन करें और लाॅकडाउन का पालन करें। स्वामी जी ने कहा कि घर में लाॅक तो रहे पर डाउन न हो, यह समय हमें भीतर के लाॅक (ताला) खोलने का मिला हुआ है। भीतर के लाॅक खुलेंगे तो जीवन का कोई भी लाॅकडाउन परेशान नहीं करेगा, तनाव नहीं पैदा करेंगा और अशान्ति नहीं करेगा इसलिये आईये जीवन के भीतरी लाॅक भी खोले और डाउन भी न हो। इस संकट के समय अपनी और अपनों की ऊर्जा बनी रह, आत्मसंयम, मनोबल और आत्मबल बना रहे। श्री हनुमान जी भी इन्हीं दिव्य गुणों के प्रतीक है।


स्वामी जी ने कहा कि इस समय परेशान न हो यह सब थोडे दिन की बात है यह समय टल जायेगा लेकिन इससे जो मजबूती मिलेगी उसका आकलन पैसों से नहीं किया जा सकता यह पक्का है बस आप सब विश्वास रखे। साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि ’सेवा, समर्पण एवं त्याग द्वारा प्रभु को आत्मसात करना ही हनुमान चरित्र का मर्म है।


सेवा के क्षेत्र में कार्य करने वालोें के लिये कहा कि ’हनुमान जी हमारे आदर्श है। हमारा भी एक ही लक्ष्यय एक ही उद्देश्य, बस प्रभु सेवा, कोरोना वायरस से पीड़ितों की सेवा और जनता जनार्दन की सेवा। ’राम काज कीन्हें बिना मोहि कहाँ विश्राम।’ जब तक राम काज पूर्ण न हो विश्राम कहाँ। राम सेवा ही हमारा विश्राम बने। प्रभु सेवा ही हमारी शक्ति होय शान्ति हो।’ उन्हाेंने हनुमान जी के चरित्र का वर्णन करते हुये कहा, ‘अनन्य भक्ति एवं निःस्र्वाथ सेवा के उत्कृष्ट उदाहरण है हनुमान जी।