कोटद्वार में प्रवासी मजदूरों के पास न पैसे हैं, न राशन सिर्फ है आश्वासन-आश्वासन-आश्वासन
कोटद्वारः कोरोना महामारी से लड़ाई में पूरा देश लॉकडाउन है। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर अपने घरों को पैदल लौटते दिहाड़ी मजदूरों की तस्वीरों से देश भर में सहानुभूति का जो सागर उमड़ा था उसकी वजह से सरकारें, स्थानीय प्रशासन और सामाजिक-धार्मिक संस्थाएं, लोग इनकी मदद के लिए देश भर में आगे आए हैं।

लेकिन कोटद्वार में हालत अब भी अच्छी नजर नहीं आ रही। कोटद्वार की फैक्ट्रियों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर न तो घर लौट सकते हैं और न ही उन्हें यहां खाना नसीब हो पा रहा है।

गढ़वाल के द्वार कोटद्वार में होटल, रेस्टोरेंट से लेकर सरकारी और निजी कार्यालय सब बंद हो चुके हैं। फैक्ट्रियों में भी लॉकडाउन के कारण ताला लटक चुका है और इसलिए इन फैक्ट्रियों में काम करने वाला श्रमिक तबका इन दिनों बड़े संकट से गुजर रहा है।

कोटद्वार के जशोधरपुर इलाके में सैकड़ों मजदूरों पर दो वक्त की रोटी का संकट गहराया हुआ है। इस्पात बनाने वाली फैक्ट्रियों में बड़ी तादाद में बिहार और यूपी के श्रमिक काम करते हैं, जो सामान्य दिनों में तो गुजारा कर लेते थे। अब लॉकडाउन के कारण बंद पड़ी फैक्ट्रियों के कारण आमदनी का जरिया बंद हो चुका है।

सरकार लगातार इस बात की अपील कर रही है कि कंपनी किसी का वेतन न काटे, लेकिन हकीकत इससे उलट है। कोटद्वार में आलम यह है कि कई फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों को पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिला है। ऐसे में श्रमिकों के सामने भुखमरी का संकट गहराने लगा है।