लाॅकडाउन मजबूरी नहीं बल्कि जरूरीः स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश, नवल टाइम्सः ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस और जल आपूर्ति स्वच्छता सहयोग परिषद् के संयुक्त तत्वाधान तथा यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से आज ’’फेथ रिस्पांस टू कोविड-19’’ का आयोजन किया गया जिसमें उच्चस्तरीय पैनल में परमार्थ निकेेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के महासचिव मौलाना महमूद मदनी, अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की तरफ से सरदार राजवन्त सिंह, ग्लोबल इंटरफेथ वाश एलायंस की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती, बौद्ध परिसंघ के महासचिव वेन धम्मापिया, फादर पाॅल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (कार्यकारी निदेशक) कैरीटस इंडिया ने सहभाग कर कोविड-19 के विषय में फैले स्टिग्मा, लाॅकडाउन के समय अपने संयम को कैसे बनायें रखे, परिवार और समुदाय की रक्षा कैसे करें, सोशल डिस्टेंसिंग का महत्व, बार-बार हाथ धोना क्यों जरूरी है तथा इस समय का सद्उपयोग कैसे करें जैसे अनेक जिज्ञासाओं का समाधान किया।

  परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि इस समय का उपयोग बाहर नहीं बल्कि भीतर जाने के लिये करें और लाॅकडाउन के समय सामाजिक अलगाव रखें लेकिन भावनात्मक अलगाव को न पनपने दें। स्वयं को ऊर्जावान बनायें रखने के लिये सकारात्मक बनें। सभी जानते हैं, हमारा देश अभी कोरोना वायरस के कारण बहुत गंभीर स्थिति में है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में पूरे 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है।

यह लाॅकडाउन वास्तव में भारत की जनता के लिये बहुत ही कठिन है लेकिन यह बहुत आवश्यक और साहसी कदम हैं जो प्रधानमंत्री को उठाना पड़ा। डब्ल्यूएचओ और अन्य सभी विशेषज्ञों की जानकारी के अनुसार, बिना लॉकडाउन के हर एक दिन भारी पड़ता और असंख्य लोगों की जान को खतरा हो सकता था।

यह अपरिहार्य, दुखद था, लेकिन और कोई विकल्प नहीं था। स्वामी जी ने बताया कि लाॅकडाउन के समय परमार्थ निकेतन द्वारा स्वर्गाश्रम और आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले संतों, भिक्षुओं, असहायों और बेघर लोगों को प्रातःकाल चाय और नाशता, दोपहर को भोजन प्रसाद और अन्य सुविधायें प्रदान की जा रही है। साथ ही निराश्रित गायों के लिये भी चारे की व्यवस्था कर रहा है।

साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि आज पूरे विश्व में जो भी परेशानियां है उसका एक ही उत्तर है कि हम सभी मिलकर कार्य करें। साध्वी जी ने कहा कि लोग लाॅकडाउन के समय अपने अपने धार्मिक स्थलों पर जाना चाहते है उन्हें यह भी लग रहा होगा कि वहां जाने पर हमें कुछ रास्ता मिलेगा तो हमें लोगों को यह विश्वास दिलाना होगा कि हमारी आस्था  जिस पर भी है वह हर समय हमारे साथ है, हम आज जहां पर भी है वहीं से प्रार्थना करें वर्तमान समय में घर पर रहना ही पुण्य का कार्य है।