परमार्थ निकेतन में मनाई आदि गुरू शंकराचार्य की जयंती

ऋषिकेश, नवल टाइम्सः परमार्थ निकेतन में हिन्दू धर्म की सर्वोच्च पीठ के जगद्गुरू, सनातन धर्म के ज्योर्तिधर भारत की महान विभूति आदिगुरू शंकराचार्य जी की जयंती के अवसर पर सोशल डिसटेंसिंग का पालन करते हुये सभी संतों ने वेद मंत्रों से शंकराचार्य जी का पूजन किया।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने लाॅकडाउन के पहले से परमार्थ निकेतन में निवास कर रहे भारत सहित विश्व के कई देशों के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अद्वैत परम्परा, सनातन धर्म और भारत के चार क्षेत्रों में स्थापित चार पीठों की गौरवमयी परम्परा और आध्यात्मिक महत्व के विषय में जानकारी प्रदान की।

 

व्यक्ति जब अस्वस्थ होता है और जब सब चीजे फेल हो जाती है तब रामबाण औषधि ही काम करती है। लाॅकडाउन ही लक्ष्मण रेखा है, इस लाॅकडाउन की लक्ष्मण रेखा को मत लांघिये इसका पालन निष्ठा के साथ करे यह देश की अद्भुत तरीके से सेवा करने का एक अवसर है। कई बार सीमा पर जाकर लड़ाई नहीं लड़ी जाती बल्कि अपने घर के दरवाजे की सीमा रेखा न लांघना ही कोरोना पर विजय प्राप्त करना है इसलिये अपने घर में रहें और सुरक्षित रहंेे।

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आदि गुरू शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित ज्योतिर्मठ, शंगेरी शारदा पीठ, द्वारिका पीठ, गोवर्धन पीठ के विषय में जानकारी देते हुये भारतीय हिन्दू दर्शन के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डाला। स्वामी जी ने कहा कि सेवा, साधना और साहित्य का अद्भुत संगम है यह परम्परा।