प्रवासियों को रोककर वीरान पहाड़ों को पुनः बसाने की मांग

देहरादूनः  23 वर्षों से कार्यरत प्रतिष्ठित समाज सेवी संस्था मौलाना अबुल कलाम आजाद अल्पसंख्यक कल्याण समिति (माकाक्स) ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ई-मेल द्वारा ज्ञापन भेेजकर कोरोना वायरस के कारण देशव्यापी लाॅकडाउन के चलते अन्य प्रदेशों से वापस लौटे हजारों प्रवासियों को उत्तराखण्ड में रोककर वीरान पड़े पहाडों को पुनः बसाने, पर्यटन विकास करने व लाॅकडाउन के कारण शुद्ध हुये नदी व अन्य जलप्रवाह निर्मल व शुद्ध रखना सुनिश्चित कराने की मुख्यमंत्री से मांग की गयी है। इस सम्बन्ध में उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री व मुख्यसचिव को ई-मेल से ज्ञापन भेजा गया है।


श्री नदीम द्वारा प्रेषित ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तराखंड केे पहाड़ों से पलायन के कारण विभिन्न ग्राम वीरान हो गये हैै लेकिन लाॅकडाउन केे चलते इन क्षेत्रोें से पलायन कर गये विभिन्न प्रवासी यहां लौट आये व विभिन्न रास्तों व दूसरे प्रदेशों में फंसे हुये है। इन प्रवासियों कोें यही बसाकर पर्यटन क्षेत्र में रोजगार देकर वीरान पड़े पहाड़ों को आबाद करके पलायन की समस्या को स्थायी रूप से हल किया जा सकता है।


श्री नदीम के ज्ञापन मे पर्यटन विकास के सम्बंध में कहा गया है कि कोरोना के बाद की परिस्थितियोें में देेश व विश्व के लोग भीड़ भाड़ वाले पर्यटन स्थलों में जाने से बचेेंगे और एकांत व जहां समाजिक दूरी व पकृति का सानिध्य संभव हो व अघ्यात्मिक वातारण हो, उन पर्यटन स्थलोें की ओर रूख करेंगे। इसका लाभ उत्तराखंड केे पहाड़ी वीरान ग्रामों में होम स्टेे योजना प्रभावी ढंग से लागू करके और उसकी बुकिंग सरकारी संस्थानों के माध्यम से आन लाइन करके उठाया जा सकता है। साथ ही दिल्ली, मुंबई व अन्य क्षेत्रों से कोरोना लाॅक डाउन के कारण लौटे प्रवासियों को इसमें स्थायी रोजगार भी दिया जा सकता है।


यह प्रवासी जहां पहाड़ी क्षेत्रोें में रह सकते हैं, वहीं बड़ेे शहरोें केे लोगों को भी जानते समझते है। इसलिये इनके सहयोेग से यहां पर्यटन विकास संभव हैै। श्री नदीम के ज्ञापन के अनुुसार प्रदूषण नियंत्रण व जल प्रवाह शुुद्ध रखना के लिये देश की बड़ी व पावन नदियां उत्तराखंड सेे निकलती हैै औैर लाॅकडाउन में इनके स्वतः साफ होने से यह साबित हो गया है कि इनके प्रदूषण का कारण व्यापारिक व औद्योेगिक गतिविधियां ही है।


इसलिये इस पर नजर रखकर लाॅकडाउन खुलते ही इनको प्रदूषण रहित रखना सुनिश्चित कराया जा सकता है। उल्लेेखनीय हैै कि आवश्यक वस्तुुओें सेे जुड़े उद्योेग लाॅकडाउन में भी चल रहे है जिससे यह नदियां व जल प्रवाह प्रदूषित नहीं हो रहे है। इसलिये प्रदूषण बोर्डोें व सम्बन्धित अधिकारियों पर कड़ाई करके पर्यावरण कानूनों का समुचित पालन कराकर इन्हेें शुद्ध रखा जा सकता है।


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