क्या कोरोना से बचाव में किए जा रहे छिड़काव एवं स्प्रे कारगर नहीं ??

  •   डब्लूूएचओ ने भी माना स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं यह उपाय       


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नवल टाइम्सः कोरोना महामारी से बचाव के लिए समूचा विश्व सजग एवं सचेत है। दुनिया के विकसित देश कोरोना महामारी के कारण हो रही मौत की दर तथा संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए तरह-तरह के संसाधनों का प्रयोग तथा डिस-इन्फेंक्शन करने के उपाय अपना रहे है। परन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से छिडकाव के यह उपाय कारगर नही है, ऐसा मानना है,  हरिद्वार के मनोवैज्ञानिक डाॅ0 शिवकुमार चौहान का कहना है कि डिस-इन्फ्रेक्ट करने के लिए छिडकाव मे प्रयोग हो रहे केमिकल से बचाव कम तथा नुकसान ज्यादा होने की संभावना है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सेनेटाईज करने के तरीकें अपनाकर इस कोरोना पेन्डामिक से बचाव संभव है। परन्तु विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने अपनी 16 मई की रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर किया है कि विभिन्न केमिकल के द्वारा डिस-इन्फ्रेंक्शन करने के लिए तैयार किए जा रहे छिडकाव के घोल से कोरोना जैसी महामारी से बचाव संभव नही हैै।
कोरोना के संक्रमण को कम करने के लिए जगह जगह पर छिडकाव मे प्रयुक्त स्प्रे, टनल स्प्रे, प्रेशर सेनेटाईजेशन, पानी मे केमिकल द्वारा घोल तैयार कर उसका स्प्रे करना आदि सभी उपाय व्यर्थ है।


अपितु ऐसा करने से इस महामारी के बचाव कम बल्कि स्वास्थ्य से जुडी समस्याए बढने का खतरा ज्यादा हो रहा है। अर्थात इस प्रकार के डिस-इन्फ्रेक्ट करने के तरीके स्वास्थ के साथ खिलवाड है। जिससे श्वसन तथा त्वचा संबंधी बीमारियों के बढने की संभावना है। छिडकाव मे प्रयोग होने वाले इन केमिकल के प्रयोग द्वारा ना हीे सुरक्षा हो सकती है और न ही कोरोना जैसी महामारी के प्रभाव को कम करने मे कोई मदद मिल सकती है।


इसलिए मनुष्य के स्वास्थ्य को देखते हुए सुरक्षा में सहायक माने जाने वाले इन साधनों का प्रयोग तुरंत बंद कर देना चाहिए ताकि स्वास्थ्य पर पडने वाले प्रतिकूल प्रभाव को कम किया जा सके।