चीन-अमरीका में फिर टकराव, अब चीन ने क्या उठाये कदम

चीन के विदेश मंत्रालय से आई खबर के अनुसार चीन सरकार शिनजियांग से जुड़े विषयों पर ग़लत व्यवहार करने वाले  व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने जा रही है।


चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चान्यिंग के अनुसार ये प्रतिबंध सोमवार से ही लागू होंगे।


इस फ़ैसले के तहत चीन के लिए बनाई गई अमरीकी संसदीय कार्यकारी समिति पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।  चीन ने अमरीकी सीनेटर मार्को रूबियो, टेड क्रूज़, क्रिस स्मिथ और सैम ब्राउनबक जो की ट्रंप प्रशासन में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता समिति के राजदूत हैं, पर प्रतिबंध लगाए हैं।


हुआ ने ये भी कहा, “अमरीकी क़दम ने चीन के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप किया है, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल नियमों का उल्लंघन किया है और चीन-अमरीका संबंधों को बुरी तरह नुक़सान पहुँचाया है। चीन इन क़दमों का कड़ा विरोध करता है और इन क़दमों की कड़ी निंदा करता है।”


चीन की सरकार ने इसके लिए अमरीका के उस फ़ैसले को ज़िम्मेदार ठहराया है, जिसके तहत ट्रंप सरकार ने चीनी नेताओं के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाए थे।


दरअसल, अमरीकी सरकार ने पिछले हफ़्ते शिनजियांग प्रांत में वीगर मुसलमान कैंपों के लिए ज़िम्मेदार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के शीर्ष नेताओ के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाए थे.


अमरीकी ट्रेज़री विभाग के मुताबिक़, इन चीनी अधिकारियों में शिनजियांग में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के सेक्रेटरी चेन क्वांगुओ और चीनी सरकार की इस नीति को क्रियान्वित करने वाले झू हैलुन शामिल हैं।


अमरीकी सरकार ने शिनजियांग पब्लिक सिक्योरिटी ब्यूरो के प्रमुख वांग मिंगशान और ब्यूरो के पूर्व प्रमुख हुओ लिउजुन को भी निशाने पर लिया है।


इन प्रतिबंधों के तहत अमरीका में इन अधिकारियों के साथ वित्तीय लेनदेन करना एक अपराध की श्रेणी में आ गया है। इसके साथ ही इन चीनी अधिकारियों की अमरीकी संपत्तियों को भी सील कर दिया गया है।


पिछले हफ़्ते अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा था, “अमरीकी सरकार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा शिनजियांग प्रांत में वीगर समुदाय, कज़ाक समुदाय और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के मानवाधिकारों के उल्लंघन को मूक दर्शक की तरह देखती नहीं रहेगी।"