सुनीति त्यागी की हद्य को छुती कविताः हर तस्वीर कुछ कहती है


सुनीति त्यागी की कविता हर तस्वीर कुछ कहती है


हर तस्वीर कुछ कहती है


 हर तस्वीर के पीछे, एक कहानी,


एक याद है, वह बताती रहती है,


हर तस्वीर कुछ कहती है।


जिंदगी की दौड़ में छूट गए, जो लम्हात


वह उन्हे फिर से, दोहराती रहती है,


हर तस्वीर कुछ कहती है।


गोद में आई एक नन्ही परी जो, हंस-हंस खिलखिलाती थी


उसी हंसी मुस्कान से मेरे मन को, फिर से गुदगुदाती रहती है


हर तस्वीर कुछ कहती है।


बेटी की रूखसती का वक्त, आंखों से छलका पानी


फिर से सीने में, उसी दर्द को, बढ़ाती रहती है


हर तस्वीर कुछ कहती है।


पहले क्या थे, अब क्या हो गए हम


उम्र के लंबे सफर का फासला, हमसे यह बताती रहती है


हर तस्वीर कुछ कहती है।


जिंदगी के सफर में कुछ फूल मिले, तो कहीं कांटे चुभे


कुछ दर्द के एहसास को, हर पल सहलाती रहती है


हर तस्वीर कुछ कहती है।


हर तस्वीर कुछ कहती है।


                                                     सुनीति त्यागी असिस्टेंट प्रोफेसर