अभिव्यक्ति/साहित्यः सुनीति त्यागी की कविता "कीमत ना पता हो"


सुनीति त्यागी की कविता कीमत ना पता हो


आंसू उसके लिए मत बहाओ, जिसको इनकी कीमत ना पता हो


प्यार उससे ना करो जिसे आप की, चाहत ना पता हो


जमाना क्या समझेगा, आपकी  साफगोई


जब उसको आपकी, आदत ही ना पता हो


मत तडपों कभी किसी के लिए, इतना


जब तक, किसी को इसके एहसास का, ना पता हो


तू समझता है, अपना सबको, तो कोई बात नहीं


तू उनको एहसास मत दिला, खुद का


जिन्हें, जब तक तेरे वजूद का, खुद ना पता हो।


आंसू उसके लिए मत बहाओ, जिसको इनकी कीमत ना पता हो।


आंसू उसके लिए मत बहाओ, जिसको इनकी कीमत ना पता हो।


                                                                                     सुनीति त्यागी